ईरान की रणनीति से बढ़ी दुनिया की चिंता , तेल की कीमत 200 डॉलर तक जाने की आशंका*

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सैयद समीना उवैस

ईरान की रणनीति से बढ़ी दुनिया की चिंता , तेल की कीमत 200 डॉलर तक जाने की आशंका

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेल को लेकर एक नई रणनीति की चर्चा हो रही है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो ईरान दुनिया की तेल आपूर्ति को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। इसके लिए सबसे अहम जगह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य मानी जाती है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य खाड़ी क्षेत्र को दुनिया के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला सबसे बड़ा तेल मार्ग है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई जैसे कई तेल उत्पादक देश अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक भेजते हैं। रोज़ाना लाखों बैरल तेल इस समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है, इसलिए इसे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन भी कहा जाता है।

अगर किसी वजह से यह रास्ता बंद होता है या यहां तनाव बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता अचानक कम हो सकती है। ऐसे हालात में कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि चरम स्थिति में कच्चे तेल का भाव 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।

ईरान की रणनीति को कई लोग दबाव की राजनीति के रूप में भी देख रहे हैं। अगर तेल की कीमतें अचानक इतनी बढ़ जाती हैं तो उसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। तेल महंगा होने से परिवहन, उद्योग और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ता है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ सकती है।

इसी वजह से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर हमेशा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सतर्कता बनी रहती है। यहां किसी भी तरह की हलचल या टकराव की आशंका तेल बाजार को तुरंत प्रभावित कर सकती है और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर उसका असर दिखाई देने लगता है।

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